यदि आपको शकीरा की कोई और अदा पसंद हो तो आप इधर घूम लीजिये
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शुक्रवार, 27 अगस्त 2010
शक़ीरा जी हां वाका वाका वाली
यदि आपको शकीरा की कोई और अदा पसंद हो तो आप इधर घूम लीजिये
जन्म- 29नवंबर 1963 सालिचौका नरसिंहपुर म०प्र० में।
शिक्षा- एम० कॉम०, एल एल बी
छात्रसंघ मे विभिन्न पदों पर रहकर छात्रों के बीच सांस्कृतिक साहित्यिक आंदोलन को बढ़ावा मिला और वादविवाद प्रतियोगिताओं में सक्रियता व सफलता प्राप्त की। संस्कार शिक्षा के दौर मे सान्निध्य मिला स्व हरिशंकर परसाई, प्रो हनुमान वर्मा, प्रो हरिकृष्ण त्रिपाठी, प्रो अनिल जैन व प्रो अनिल धगट जैसे लोगों का। गीत कविता गद्य और कहानी विधाओं में लेखन तथा पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन। म०प्र० लेखक संघ मिलन कहानीमंच से संबद्ध। मेलोडी ऑफ लाइफ़ का संपादन, नर्मदा अमृतवाणी, बावरे फ़कीरा, लाडो-मेरी-लाडो, (ऑडियो- कैसेट व सी डी), महिला सशक्तिकरण गीत लाड़ो पलकें झुकाना नहीं आडियो-विजुअल सीडी का प्रकाशन
सम्प्रति : संचालक, (सहायक-संचालक स्तर ) बालभवन जबलपुर
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इधर उधर घूम लिये आपके सौजन्य से . वैसे उधर वाली शकीरा ना होती तो इधर वाली को पूछता कौन
जवाब देंहटाएं'इधर जाइये' 'इधर जाइये' ब्लोग है या जंतर मंतर ?
जवाब देंहटाएंशकीरा की चड्डी-बनियान वाले फ़ोटो बहुत पसंद आये................
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................................ 'गोस्वामीजी' और उनके दोनों ग्रेंद्चिल्डन को.
कुछ भी कहो पर हमे तो शकीरा...........
जवाब देंहटाएंजिस ' प्रोफेशन' से ये लोग जुडी हैं उनमे कम कपड़े पहनना उनकी जरूरत और मजबूरी भी है. मैं इसकी विरोधी नही. शकीरा के डांस के कुछ स्टेप्स एकदम बेली डांस के ही होते हैं उसके लिए इस तरह के कपड़े पहना पड़ता है. कोई साड़ी पहन कर तो बेली-डांस तो नही कर सकता ना?
मेरी मजाक करने की आदत है.यूँ ही थोड़ी छेड़ खानी,हँसी मजाक....
प्लीज़ बुरा मत मानियेगा.
ये अभिनेता अभिनेत्रियाँ अंग प्रदर्शन ना करते तो शायद हम कभी जान ही ना पाते कि शारीरिक-सौष्ठव भी कोई चीज होती है.इस से लोगों मे 'हेल्द कोंशस्नेस' आई है.इसमें कोई दो राय नही.संपादित करें1:12 am
आपने सही कहा औरत के वस्त्र कम नहीं होने चाहिये यह हमारी संस्कृति के लिये वाक़ई मिसफ़िट है. परन्तु मैने शक़ीरा के दूसरे पहलू को दिखाना चाहा है. कि वो यूनिसेफ़ के साथ मिल कर जो भी कर रही है बेहद सराहनीय है. हिंदुस्तान की कोई भी अभिनेत्री/लेखिका/ मुझे ऐसे कार्य में सम्बद्ध नहीं मिलि. वैसे आप को बता दूं की शक़ीरा जिन लोगों के लिये काम कर रही है वे शायद ही उसे पहचानते हैं.आपकी क्या राय है ताई
जवाब देंहटाएंअच्छा कार्य किसके लिए कर रहे है ,ये जानना जरुरी नही होता ,जरुरी होता है जरुरतमंद के लिए कार्य का किया जाना |अच्छे इंसान कि हर अदा निराली होती है .....रही बात कम कपडों कि तो वक्त के साथ नजरिये और सोच को भी बदलना बेहतर होता है |अपनी कला के सही उपयोग का एक बेमिसाल उदाहरण है शकीरा .........
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